परिचय

यह प्रामाणित सत्य है कि जो व्यक्ति अपने पूर्वजों के साहसिक कार्य पर गर्व नहीं करेगा वह अपने जीवन में ऐसा कुछ नहीं कर पायेगा जिस पर उसके वंशज गर्व कर सकें।
  • (1) वीर जाट द्रह्म – ये चन्द्रवंशी जाट थे जिन्होंने 2207 ईसा पूर्व चीन के तातार प्रदेश में पहुंचकर राज की स्थापना की, जिसे बाद में यूती जाति के नाम से जाना गया। यही चीन के पहले राजा हुए हैं।
  • (2) जाट योद्धा स्कन्दनाभ – ये चन्द्रवंशी जाट थे जो सबसे पहले अपने दल के साथ 500 ईसा पूर्व एशिया माइनर से होते हुए यूरोप पहुंचे तथा इसी नाम पर स्कंदनाभ राज बनाया जो बाद में स्कैण्डीनेविया कहलाया तथा जटलैण्ड की स्थापना की जिसे आज भी जटलैण्ड ही कहा जाता है। इसके बाद बैंस, मोर, तुड् आदि अनेक गोत्रीय जाट गए जो पूरे यूरोप में फैले जिन्हें बाद में गाथ व जिट्स आदि नामों से जाना गया।
  • (3) राजा गज – इन्होंने सबसे पहले अफगानिस्तान में गजनी राज की स्थापना की तथा गजनी के पास बुद्ध का एक बड़ा विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्तूप बनवाया था जिसे सन् 2001 में सभी विरोधों के बावजूद तालिबानियों ने डायनामाइट से उड़वा दिया। राजा गज के वंशज राजा बालन्द ने इस्लाम धर्म अपनाया। इसके बाद वहां के सभी जाट मुस्लिम धर्मी हो गए और इन जाटों ने चंगताई नामक मुगलवंश की स्थापना की।
  • (4) राजा वीरभद्र – इन्हें जाटों का प्रथम राजा कहा जाता है, जिन्होंने हरद्वार पर राज किया। इनके नाम पर हरद्वार के पास रेलवे स्टेशन है। इनका वर्णन देव संहिता में है। नील गंगा को जाट खोद कर लाये थे जिसे आज भी जाट गंगा कहा जाता है।
  • (5) मता जाट राजा – ये शिवी गोत्री जाट थे, जिन्होंने शिवस्तान पर राज किया।
  • (6) राजा चित्रवर्मा – ये बलोचिस्तान के राजा थे, जिनकी राजधानी कुतुल थी।
  • (7) राजा चन्द्रराम – हाला गोत्री जाट, जिसने सूस्थान पर राज किया।
  • (8) नरेश मूसक सेन – मौर गोत्र के जाट राजा जिन्होंने सिन्ध पर राज किया। इन्होंने सिकन्दर को सिन्ध से ब्यास तक पहुंचने पर 19 महीने तक उलझाए रखा।
  • (9) राजा सिन्धुसेन – मौर गोत्री जाट, जो सिन्ध के प्रसिद्ध राजा हुए।
  • (10) महाराजा जगदेव पंवार – अमरकोट के प्रसिद्ध राजा हुए जो पंवार गोत्री थे। गुजरात के जाट राजा सिद्धराज सोलंकी ने अपनी सुन्दर कन्या वीरमती का इनसे विवाह किया था। लोहचब पंवार गोत्र भी इन्हीं के वंशज हैं।
  • (11) वहिपाल – कुलडि़या गोत्री जाट, जिसने मारवाड़ (राज.) पर राज किया।
  • (12) नरेश कंवरपाल – कंसवा गोत्री जाट, जिन्होंने जांगल प्रदेश (राज.) पर राज किया। इनका राज सातवीं सदी तक था। ये महान् प्रशासक थे।
  • (13) नरेश कान्हा देव – ये पूनियां गोत्री जाट राजा थे। इनका पश्चिमी राजस्थान पर राज था। इन्हें कभी नहीं हारनेवाला राजा कहा गया है।
  • (14) राजा जयपाल – दसवीं सदी के महान् जाट राजा हुए, जिनका विशाल राज्य था। इन्हीं का पुत्र राजा आनन्दपाल तथा इनका पौत्र सुखपाल हुआ, जिसने मुस्लिम धर्म अपनाया और नवाबशाह कहलाये।
  • (15) सम्राट् कक्कुक – काक गोत्री जाट, जिसने जोधपुर क्षेत्र पर राज किया।
  • (16) नरेश सिद्धराज विष्णु – पल्लव गोत्री जाट, जिसने दक्षिणी भारत पर राज किया।
  • (17) नरेश नरसिंह वर्मन – नरेश सिद्धराव के पौत्र जिसने सन् 640 में श्रीलंका पर विजय पाई।
  • (18) राजा रिसालू – सातवीं सदी में स्यालकोट क्षेत्र पर राज किया।
  • (19) राजा भोज – पंवार गोत्री जाट, जिनका इतिहास आज भी गांव के लोगों की जनश्रुतियों में है।
  • (20) राजा मुंजदेव – पंवार गोत्री जाट, जिनका दसवीं सदी में मालवा (पंजाब) क्षेत्र पर राज था।
  • (21) राजा अजीत व राजा बछराज – मोहिल गोत्री जाट, जिनका राजपूतों से पहले जोधपुर पर राज था। याद रहे जोधपुर व जालौर के किले दहिया जाट राजाओं ने बनवाये थे।
  • (22) राजा शिशुपाल – चेदि गोत्री जाट, जिसने बुन्देलखण्ड पर राज किया।
  • (23) सम्राट् चकवाबैन – इनका पूरे पंजाब पर राज रहा, इन्हीं के पौत्र मघ ने स्वप्नसुन्दरी राजकुमारी निहालदे से विवाह किया। इसी चकवाबैन से जाटों के बैनीवाल गोत्र की उत्पत्ति हुई।
  • (24) राजा छत्रसाल – गोहद (मध्यप्रदेश) के राजा, जिन्होंने लड़ाई में मराठों को हराया।
  • (25) सरदार झूंझा – नेहरा गोत्री जाट योद्धा जिसके नाम पर झूंझनू (राजस्थान) शहर बसाया। नेहरा जाटों का राज राजस्थान में नरहड़ और नाहरपुर पर था। इसलिए इस क्षेत्र (राज.) को पहले नेहरावाटी कहते थे, जो बाद में शेखावाटी कहलाया।
  • (26) कंवरपाल जाट – कसवां गोत्री जाट, जिसने राजस्थान में राठौर राजपूतों से आखिर तक लोहा लिया।
  • (27) तोला सरदार – तोयल गोत्री योद्धा जाट जिसने नागौर (राज.) जिले के खारी क्षेत्र पर राज किया। यहां शिलालेख मिला है जिस पर लिखा है-