आरक्षण

Date 11-6-2018

श्रीमति वसुन्धरा राजे जी,
मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार, जयपुर।

विषयः- आरक्षण को लागू करने के लिये अधिनियम के तहत प्रक्रिया निर्धारित करने के
सम्बन्ध में।
महोदया,
निवेदन है कि राजस्थान सरकार की आरक्षण नीति को लागू करने के सम्बन्ध में संक्षिप्त एक्ज्यूक्यूटिव आर्डर है। जिसके परिणाम स्वरूप राजस्थान लोक सेवा आयोग, राजस्थान अधीनस्थ मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड, नियुक्ति प्राधिकारी, अधिकारीगण तथा न्यायालय आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया की मनमानी व्याख्या करते है और न्यायालयों का अनावश्यक हस्तक्षेप होता है जिसकी वजह से भर्ती प्रक्रिया दशकों में जाकर पूरी होती है जिसका दुष्परिणाम राज्य प्रशासन एवं बैरोजगार अभ्यर्थियों को भूगतना तो पड़ ही रहा है बल्कि विचारणिय स्थिति यह है कि आरक्षित वर्ग के आरक्षण को मात्र सांकेतिक स्थिति में ला दिया है तथा राज्य की 15 प्रतिशत से कम अनारक्षित जातियों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इस प्रकार आरक्षण की स्थिति को संविधान के प्रावधानों उल्लघन एवं राज्य की नीति के बिलकूल विपरीत स्थिति में ला दिया है।
अतः हमारा निवेदन है कि राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू करने के लिये अधिनियम द्वारा प्रक्रिया विस्तृरित रूप से निर्धारित किया जाये जिससे कि चयन प्राधिकारियों, आयोग, बोर्ड एवं न्यायालयों का हस्तक्षेप कम से कम हो तथा भर्ती प्रक्रिया में कोई रूकावट नही आये।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान जाट महासभा एवं आरक्षण अधिकार मंच ने इस सम्बन्ध में सरकार को स्थिति से विस्तार में कई बार अवगत कराया है लेकिन अफसोस का विषय है कि राज्य सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ध्यान नही दिया है।
(राजाराम मील)

Date 9-6-2018

आरक्षण के साथ हो रहे छेड़-छाड़ के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर समाधान के लिये निवेदन किया

श्री नरेन्द्र मोदी,
माननीय प्रधानमंत्री,
भारत सरकार, नई दिल्ली।

विषयः- आरक्षण से छेड़छाड़ के सम्बन्ध में।

महोदय,
उपरोक्त विषय में निवेदन है कि राजस्थान में 85 प्रतिशत आरक्षित वर्ग (एससी, एसटी, ओबीसी, एसबीसी, महिला, विकलांग, उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं भूतपूर्व सैनिक) रहता है। सरकार में नियुक्त कुछ मनुवादी सोच के अधिकारी जिनको सरकार द्वारा न तो प्रशिक्षण दिया गया है और न ही उन्हें आरक्षण नियमों का ज्ञान है। ये अधिकारी मृतक आश्रित आरक्षण को छोड़कर अन्य सभी आरक्षित वर्ग से चिड़ते है एवं उनको नुकसान पहुचाने में लगे रहते है जो इस प्रकार हैः-
1. सामान्य वर्ग का गलत अर्थ निकालनाः- सुप्रीम कोर्ट के नो जजों की बैंच द्वारा सामान्य वर्ग का आशय मैरिट आधार पर चयनित अभ्यर्थियों से लगाने बाबत फैसला दिया जा चुका है लेकिन राजस्थान के ये अधिकारी सामान्य वर्ग का अर्थ अनारक्षित वर्ग से लगाकर 8 प्रतिशत लोगों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की कोशिश करते है। अतः हमारा निवेदन है कि कार्मिक विभाग द्वारा यह स्पष्टीकरण जारी करवाया जावे कि सामान्य वर्ग का अर्थ भर्ती प्रक्रिया एवं कार्यरत कर्मचारियों के कुल पदों की गणना में सामान्य वर्ग का अर्थ मैरिट आधार से चयनित अभ्यर्थियों से लगाया जावे।
2. एक भर्ती की एक से अधिक सूचिया जारी करने में अनियमितताः- राजस्थान लोक आयोग एवं अधिनस्थ सेवा चयन बोर्ड द्वारा एक भर्ती से एक से अधिक सूचियां बनाने पर द्वितीय सूची में आरक्षित वर्ग को मैरिट आधार पर चयन नही किया जाता। जबकि नियमानुसार आरक्षित वर्ग के अपात्र एवं नाॅनजोईनर्स के स्थान पर केवल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी एवं सामान्य वर्ग के अपात्र एवं नाॅनजोईनर्स के स्थान पर पूरे परिणाम को रिसफल कर सभी वर्गो के अभ्यर्थियों का चयन किया जाना चाहिये। जैसे राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती 2013 में प्रथम सूची सचिवालय कार्यालय हेतु मैरिट के अभ्यर्थी 70 का चयन किया गया एवं द्वितीय सूची आयोग कार्यालय के लिये मैरिट के अभ्यर्थी 20 का चयन करना आयोग के समझ में नही आया। इसके लिये आयोग को सचिवालय एवं आयोग कार्यालय के लिये मैरिट वाले सारे अभ्यर्थी 70़20त्र90 का चयन मैरिट आधार पर करना चाहिये था जो आयोग द्वारा नही किया गया। आयोग कार्यालय की सूची में मैरिट क्रमांक 71 से 90 तक पूर्व चयनित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या के बराबर आरक्षित वर्ग के दूसरे अभ्यर्थी मैरिट आधार पर चयन किये जाने चाहिये थे।
3. दण्डवत आरक्षण में सामान्य वर्ग का गलत अर्थ निकालनाः- आयोग एवं अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अधिकारी दण्डवत आरक्षण (भूतपूर्व सैनिक, विकलांग, उत्कृष्ट खिलाड़ी एवं मंत्रालयिक कर्मचारी) में सामान्य वर्ग का अर्थ अनारक्षित वर्ग से लगाकर 8 प्रतिशत लोगों को 50 प्रतिशत आरक्षण देते है एवं ओबीसी के 54 प्रतिशत लोगों को 21 प्रतिशत में समायोजित करते है। अतः हमारा निवेदन है कि सामान्य वर्ग का आशय दण्डवत आरक्षण में मैरिट आधार से चयनित अभ्यर्थियों से लगाया जाये एवं मैरिट आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को ही सामान्य वर्ग में समायोजित किया जाये।
अतः हमारा निवेदन है कि भर्ती की समस्त प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता यथा, ओएमआर सीट, नाम, प्राप्तांक, वर्ग, जन्म तिथि, मैरिट क्रमांक आदि ईटरनेट पर सार्वजनिक करवाये, आरक्षण नियमों को स्कूल एवं काॅलेजों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करवाये जाये, चयनित अधिकारियों को आरक्षण नियमों का प्रशिक्षण दिया जाये एवं आरक्षण नियमों की पालना नही करने वाले अधिकारियेां की पदौन्नति एवं वेतन वृद्वियां रोकने के दण्ड से दण्डित करवाने के आदेश जारी करने की कृपा करें।
भवदीय

(राजाराम मील)
Mob 9829010221

Date 3-6-2018

एससी, एसटी एवं ओबीसी भाईयों और मित्रों आपके लिये संदेश

      हाॅल ही में एससी] एसटी एवं ओबीसी वर्ग के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिनांक 28-5-2018 और 29-5-2018 को दो फैसले दिये गये। आरएएस भर्ती परीक्षा 2013 के मामले में आरपीएससी द्वारा हर वर्ग के 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिये बुलाया गया था जिसमें सामान्य वर्ग की कट आॅफ 250 तथा ओबीसी की कट आॅफ 283 रही थी। इसी तरह पटवारी भर्ती परीक्षा 2015 में भी सामान्य वर्ग की कट आॅफ 104 एससी की 123 एसटी की 112 एवं ओबीसी की 148 अंक रही थी। आरएएस भर्ती परीक्षा 2013 में राजस्थान हाईकोर्ट डीबी बैंच द्वारा आरक्षित एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के पक्ष में फैसला दिया था तथा पटवारी भर्ती परीक्षा 2016 का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा था उस समय आरएएस भर्ती परीक्षा 2013 के अभ्यर्थी भी उसी रीट याचिका में अपना पक्ष रखा था] तत्पश्चात माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आरपीएससी एवं अधीनस्थ बोर्ड दोनों को तलब किया था और दोनों संस्थाओं ने यह मान लिया था कि दोनों ही भर्ती परीक्षाओं में सामान्य वर्ग की कट आॅफ अंक तक के अभ्यर्थियों को बुलाया जायेगा और आरपीएससी एवं अधीनस्थ बोर्ड ने सामान्य वर्ग की कट आॅफ अंक तक के अभ्यर्थियों को बुलाया भी गया था। दोनों ही भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थी नौकरी कर रहे है।  

    यहां पर मैं यह भी उल्लेख करना चाहता हूं कि सामान्य वर्ग का मतलब मैरिट होता है। कुछ लोग सामान्य वर्ग को एससी, एसटी, ओबीसी की तरह का वर्ग मान रहे है अगर यह वर्ग होता तो इसका मतलब यह हुआ कि सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत आरक्षण है जिनकी जनसंख्या मात्र 15 प्रतिशत है लेकिन यह वर्ग नही है सामान्य वर्ग में 50 प्रतिशत उन अभ्यर्थियों को लिया जाता है जो मैरिट में आते है उसमें सभी वर्गों के अभ्यर्थी होते है जो मैरिट में है। उसके बाद 50 प्रतिशत आरक्षित वर्ग (एससी, एसटी एवं ओबीसी) से रिक्तियां भरी जाती है। लेकिन आरपीएससी एवं अधीनस्थ बोर्ड उल्टा कर रही है और राजस्थान हाईकोर्ट भी उनके एवं समता मंच के हिसाब से फैसला दे रहे है।  

     यूपीएससी भर्ती परीक्षा में ऐसी धांधली कभी भी नही होती है वहां पर हर भर्ती आरक्षण नियमों से होती है इसलिये कोई भी भर्ती कोर्ट में नही जाती। लेकिन राजस्थान में पिछले 20 साल से तो मैं स्वयं देख रहा हूं कि कोई भर्ती हो सभी आरक्षित वर्ग के खिलाफ नियम बनाये जाते है और हर भर्ती कोर्ट में जाती है और अंत तक सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है।

     भारत के सर्वोच्च न्यायालय के उक्त डाईरेक्शन एवं राजस्थान हाईकोर्ट के डीबी बैंच के फैसले के बाद भी राजस्थान हाईकोर्ट ने समता मंच के साथ मिलकर संविधान और सुप्रीम कोर्ट की डाईरेक्शन के विरूद्ध एवं एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के खिलाफ उक्त दोनों फैसले किये है। इसका मतलब यह हुआ कि राजस्थान हाईकोर्ट भारत के सर्वोच्च न्यायालय से भी बड़ा है और समता मंच की दायर की गई रीट याचिकाओं पर जल्दबाजी में फैसले दे देते है फैसले भी ऐसे समय में देते है जब वकिल भी हड़ताल पर रहते है ताकि सही तथ्य कोर्ट में पेश नही कर सके। इससे यह जाहिर होता है कि एससी, एसटी एवं ओबीसी (आरक्षित वर्ग) के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट एवं उच्च वर्ग हाथ धोकर पीछे पड़ा हुआ है। समता मंच तो यह चाहता है कि एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के लोग सरकारी नौकरी ही नही करे और जो अभ्यर्थी सरकारी नौकरी कर रहे है उन्हें कोर्ट में झुठै तथ्य पेश कर ऐसे फैसले करवा लेते है कि उन्हें भी हटाना पड़ेगा। ऐसा लगता है कि संवैधानिक संस्थाऐं एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के लोगों पर अत्याचार करने के लिये बनाई गई है और जो भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी नौकरी लगे हुये है उन्हें हटाने का काम कर रही है। राजस्थान सरकार भी हाईकोर्ट द्वारा दिये जा रहे फैसलों को आंख मूंदकर देख रही है जिसका परिणाम सरकार को भी भुगतना पड़ेगा। एससी, एसटी एवं ओबीसी में उक्त दोनों हाईकोर्ट के फैसलों के खिलाफ भंयकर रोष है आने वाले दिनों में इसका साफ असर दिखेगा।

 राजाराम मील

मो0 9829010221

 

Date 13-6-2015

मुख्यमंत्री जी,
राजस्थान सरकार,
जयपुर।
विषयः- अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के सम्बन्ध में।
महोदया,
राज्य सरकार ने राज्य सरकार एवं राजकीय उपक्रमों की सेवाओं तथा षिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 21 प्रतिषत आरक्षण के आदेष जारी किये हुये है लेकिन बहुत से विभागों में अधिनस्थ सेवाओं में आरक्षण ठीक से लागू नही किया जा रहा है। राज्य के विष्वविद्यालय एवं काॅलेजों में भी आरक्षण को इस प्रकार लागू किया जा रहा है जिससे अनारक्षित वर्ग को 50 प्रतिषत आरक्षण दिया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग अनु0जाति एवं जनजाति के आरक्षण को लागू करने में निम्नलिखित प्रकार से अनियमितताऐं की जा रही हैः-

1. राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग का 50 प्रतिषत आरक्षण है तथा शेष 50 प्रतिषत सीटे अनारक्षित है। आरक्षण नीति को लागू करने का तरीका यह है कि सबसे पहले 50 प्रतिषत अनारक्षित पदों पर मेरिट के आधार पर नियुक्ति/प्रवेष दे दिया जाये जिसमें सभी वर्गों के अभ्यर्थी सम्मिलित होगे। इसको सामान्य वर्ग की संज्ञा दी जाती है इसके पष्चात सामान्य वर्ग के अन्तिम अभ्यर्थी के नीचे के मेरिट के अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर उनके आरक्षित वर्ग में नियुक्ति दी जानी चाहिये। कुछ विभाग एवं षिक्षण संस्थाऐं जब आरक्षण को लागू करते है तो अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मेरिट सूची से निकालकर अलग सूची बना देते है। परिणाम स्वरूप मेरिट सूची में षेष रहे अभ्यर्थी केवल मात्र अनारक्षित वर्ग के रह जाते है। इन अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिषत पदो के विरूद्ध नियुक्ति/प्रवेष दे दिया जाता है। इस प्रकार से 50 प्रतिषत पद अनारक्षित वर्ग के लिये आरक्षित हो जाते है। इन अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी की संज्ञा दी जाती है अर्थात सामान्य श्रेणी में केवल मात्र अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति/प्रवेष दे दिया जाता है।
2. अनुसूचित जाति का आरक्षण 16 प्रतिषत अनुसूचित जन जाति का 12 का प्रतिषत तथा पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 21 प्रतिषत है लेकिन इन वर्गों के अभ्यर्थी 50 प्रतिषत अनारक्षित (सामान्य वर्ग) के पदों के लिये भी प्रतियोगी होते है। इस प्रकार अनुसूचित जाति का अभ्यर्थी 66 प्रतिषत अनुसूचित जनजाति का अभ्यर्थी 62 प्रतिषत तथा अन्य पिछडा वर्ग का अभ्यर्थी 71 प्रतिषत पदो के लिये प्रतियोगी होता है। कुछ विभाग चयन के लिये साक्षात्कार रखते है जिसमें पदों के तीन गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाते है। ऐसे मामलों में चयन प्राधिकारी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनके केवल आरक्षण के कोटे के तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाते है तथा अनारक्षित 50 प्रतिषत पदो के तीन गुना पदो को सम्मिलित नही करते उदाहरण के लिये यदि 100 पदों की भर्ती है तो अन्य पिछड़ा वर्ग के 21 प्रतिषत का तीन गुना अर्थात 63 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाते है जबकि पिछडे वर्ग के अभ्यर्थी 71 पदों के लिये प्रतियोगी होते है अतः पिछड़ा वर्ग के 71ग3 अर्थात 213 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाना चाहिये। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों तथा मेरिट कटआॅफ अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से काफी उंचा रह जाता है और आरक्षण प्रतिषत षून्य ही नही हो जाता बल्कि जो अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग में नियुक्ति पाने के अधिकारी है उन्हें भी आरक्षित वर्ग में नियुक्ति दे दी जाती है।
3. संविधान की धारा 16 में संषोधन के जरीये यह प्रावधान किया हुआ है कि अनु0जाति, जनजाति के बैकलाॅग के मामलें में 50 प्रतिषत से अधिक आरक्षण का सिद्धान्त लागू नही होगा, लेकिन अधिकांष विभाग संविधान के उपरोक्त प्रावधानों को अनदेखा करते हुये अनु0जाति, जनजाति के बैकलाॅग के मामलों में भी 50 प्रतिषत से अधिक आरक्षण नही होने का सिद्धान्त लागू करते हुये अनु0जाति, जनजाति के निर्धारित कोटे से अधिक बैकलाॅग के पदों के विरूद्ध अन्य पिछड़ा वर्ग के पदों को कम कर देते है जबकि अनु0जाति,जनजाति के बैकलाॅग के मामले में अनारक्षित पदों को कम किया जाना चाहिये न कि अन्य पिछड़ा वर्ग के पदो को।
4. कुछ विभाग भर्ती के समय आरक्षित वर्ग के पदों की गणना गलत कर लेते है। आरक्षित वर्गों के पदों की गणना के मामलें में यदि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी उनके निर्धारित कोटे से अधिक है चाहे वे मेरिट के आधार पर आये हो या पिछड़ा वर्ग का आरक्षण लागू होने से पहले आये हो उन्हें भी उनके आरक्षित वर्ग में गिना जाकर आरक्षित वर्ग के निर्धारित कोटे से अधिक यदि उस वर्ग के कर्मचारी है तो उस विभाग की नई भर्ती में उस वर्ग की रिक्तियों को उतना कम कर दिया जाता है जितने अभ्यर्थी उस वर्ग के उनके निर्धारित कोटे अधिक है। ये व्यवस्था राज्य सरकार की आरक्षण नीति के विरूद्ध है। हालांकि अनु0जाति, जनजाति के अभ्यर्थी सामान्यतया किसी संवर्ग में उनके निर्धारित कोटे से अधिक नही होते लेकिन अन्य पिछडा वर्ग के अभ्यर्थी अनारक्षित पदों पर भी मेरिट के आधार पर आते है ऐसी स्थिति में इस प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण विपरीत रूप से प्रभावित हो रहा है।
5. अनारक्षित वर्ग में महिलाओं के आरक्षण में केवल मात्र अनारक्षित वर्ग की महिलाओं को ही आरक्षण दिया जा रहा है जबकि अनारक्षित वर्गों पर सभी वर्गों का समान अधिकार है। अतः अनारक्षित वर्ग में महिलाओं का आरक्षण भी मेरिट के आधार पर सभी वर्ग की महिलाओं को होना चाहिये।
6. अनारक्षित वर्ग पर नियुक्ति दिये गये जो अभ्यर्थी सेवा ज्याईन नही करते है उनके स्थान पर मेरिट के आधार पर ही नये अभ्यर्थियों को मौका देना चाहिये और ऐसी मेरिट में यदि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी हो जिन्हें उनके वर्ग में आरक्षण के आधार पर नियुक्ति दे दी गई है उन्हें अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति सूची में रखा जाना चाहिये तथा इस प्रकार आरक्षित वर्ग में रिक्त हुये स्थानों को भी आरक्षित अभ्यर्थियों से भरना चाहिये लेकिन इस नियम की पालना नही की जा रही यहां तक कि लोक सेवा आयोग भी इस नियम की पालना नही कर रहा है।
7. नियुक्तियों एवं प्रवेष के मामलें में मेरिट क्रमांक, मेरिट नम्बरों का प्रतिषत, आरक्षण की स्थिति इत्यादि विभाग/षिक्षण संस्थान की वेबसाईट पर प्रदर्षित करनी चाहिये जिससे कि पारदर्षिता दिखे। लेकिन अधिकांष विभाग अपनी गलतियों को छुपाने के लिये नियुक्तियों में पारदर्षिता नही बरतते तथा उपरोक्त उल्लेखित स्थिति को वेबसाईट पर प्रदर्षित नही करते।
8. राज्य सरकार का आदेष है कि एकल पद पर आरक्षण नही होगा। इन आदेषों की ओट में कुछ विभाग विषेषतः विष्वविद्यालयों में प्रत्येक विभाग के प्रत्येक विषय के सहायक प्रोफेसर, एसोसियट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के पदों को एकल पद मानकर इन पदों को आरक्षण से बाहर कर दिया है। उदाहरणार्थ राजस्थान संस्कृत विष्वविद्यालय।
9. नेषनल विधि विष्वविद्यालय जोधपुर राज्य सरकार द्वारा स्थापित विष्वविद्यालय है लेकिन यह विष्वविद्यालय राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू नही कर रहा है।
10. राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू नही करने तथा आरक्षण को विकृत करने, अनारक्षित वर्ग को 50 प्रतिषत आरक्षण देने तथा उपरोक्त प्रकार की त्रुटियों के मामलें में राज्य सरकार ने आजतक न तो किसी नियुक्ति अधिकारी से प्रष्न किया है और न ही किसी नियुक्ति अधिकारी को दण्डित किया है। ऐसी स्थिति में नियुक्ति अधिकारी राज्य सरकार की आरक्षण नीति को मनमाने तरीके से लागू कर रहे है।

उपरोक्त परिपेक्ष्य में हमारा निवेदन है कि राज्य सरकार के स्तर से एक बार पुनः समस्त नियुक्ति अधिकारियों एवं षिक्षण संस्थानों को निर्देष दिये जाये कि वे नियुक्तियों एवं प्रवेष में उपर उल्लेखित त्रुटियां नही करे। साथ ही ये भी निवेदन है कि कार्मिक विभाग में आरक्षण पर निगरानी के लिये एक सेल स्थापित किया जाये तथा जो भी विभाग नियुक्तियों के लिये विज्ञापन जारी करे तथा नियुक्तियों जारी करे उससे पूर्व कार्मिक विभाग के आरक्षण सेल से प्रक्रिया का अनुमोदन करवा ले।

सादर।
भवदीय

(राजाराम मील)
अध्यक्ष
राजस्थान जाट महासभा

 

राज्य सरकार ने राज्य सरकार एवं राजकीय उपमों की सेवाओं तथा  शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिये 21 प्रतिशत आरक्षण के आदेश जारी किये हुये है लेकिन बहुत से विभागों में अधिनस्थ सेवाओं में आरक्षण ठीक से लागू नही किया जा रहा है। राज्य के विश्वविघयाल एवं कॉलेजों में भी आरक्षण को इस प्रकार लागू किया जा रहा है जिससे अनारक्षित वर्ग को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग अनु0जाति एवं जनजाति के आरक्षण को लागू करने में निम्नलिखित प्रकार से अनियमितताऐं की जा रही है:-

1. राज्य में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग का 50 प्रतिशत आरक्षण है तथा शेष 50 प्रतिशत सीटे अनारक्षित है। आरक्षण नीति को लागू करने का तरीका यह है कि सबसे पहले 50 प्रतिशत  अनारक्षित पदों पर मेरीट के आधार पर नियुक्ति/प्रवेश  दे दिया जाये जिसमें सभी वर्गों के अभ्यर्थी सम्मिलित होगे। इसको सामान्य वर्ग की संज्ञा दी जाती है इसके पश्चात सामान्य वर्ग के अन्तिम अभ्यर्थी के नीचे के मेरीट के अभ्यर्थियों को मेरीट के आधार पर उनके आरक्षित वर्ग में नियुक्ति दी जानी चाहिये। कुछ विभाग एवं  शिक्षण संस्थाऐं जब आरक्षण को लागू करते है तो अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को मेरीट सूची से निकालकर अलग सूची बना देते है। परिणाम स्वरूप मेरीट सूची में शेष रहे अभ्यर्थी केवल मात्र अनारक्षित वर्ग के रह जाते है। इन अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत  पदो के विरूद्ध नियुक्ति/प्रवेश  दे दिया जाता है। इस प्रकार से 50 प्रतिशत  पद अनारक्षित वर्ग के लिये आरक्षित हो जाते है। इन अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी की संज्ञा दी जाती है अर्थात सामान्य श्रेणी में केवल मात्र अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति/प्रवेश   दे दिया जाता है।

2. अनुसूचित जाति का आरक्षण 16 प्रतिशत अनुसूचित जन जाति का 12 का प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 21 प्रतिशत है लेकिन इन वर्गों के अभ्यर्थी 50 प्रतिशत अनारक्षित (सामान्य वर्ग) के पदों के लिये भी प्रतियोगी होते है। इस प्रकार अनुसूचित जाति का अभ्यर्थी 66 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति का अभ्यर्थी 62 प्रतिशत तथा अन्य पिछडा वर्ग का अभ्यर्थी 71 प्रतिशत पदो के लिये प्रतियोगी होता है। कुछ विभाग चयन के लिये साक्षात्कार रखते है जिसमें पदों के तीन गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाते है। ऐसे मामलों में चयन प्राधिकारी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को उनके केवल आरक्षण के कोटे के तीन गुना अभ्यर्थियों को बुलाते है तथा अनारक्षित 50 प्रतिशत पदो के तीन गुना पदो को सम्मिलित नही करते उदाहरण के लिये यदि 100 पदों की भर्ती है तो अन्य पिछड़ा वर्ग के 21 प्रतिशत का तीन गुना अर्थात 63 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाते है जबकि पिछडे वर्ग के अभ्यर्थी 71 पदों के लिये प्रतियोगी होते है अत: पिछड़ा वर्ग के 71ग3 अर्थात 213 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाना चाहिये। ऐसे मामलों में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों तथा मेरिट कट आँफ अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से काफी उंचा रह जाता है और आरक्षण प्रतिशत शुन्य ही नही हो जाता बल्कि जो अभ्यर्थी मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग में नियुक्ति पाने के अधिकारी है उन्हें भी आरक्षित वर्ग में नियुक्ति दे दी जाती है।

3. संविधान की धारा 16 में संशोधन के जरीये यह प्रावधान किया हुआ है कि अनु0जाति, जनजाति के बैकलॉग के मामलें में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण का सिद्धान्त लागू नही होगा, लेकिन अधिकांश विभाग संविधान के उपरोक्त प्रावधानों को अनदेखा करते हुये अनु0जाति, जनजाति के बैकलॉग के मामलों में भी 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नही होने का सिद्धान्त लागू करते हुये अनु0जाति, जनजाति के निर्धारित कोटे से अधिक बैकलॉग के पदों के विरूद्ध अन्य पिछड़ा वर्ग के पदों को कम कर देते है जबकि अनु0जाति,जनजाति के बैकलॉग के मामले में अनारक्षित पदों को कम किया जाना चाहिये न कि अन्य पिछड़ा वर्ग के पदो को।

4. कुछ विभाग भर्ती के समय आरक्षित वर्ग के पदों की गणना गलत कर लेते है। आरक्षित वर्गों के पदों की गणना के मामलें में यदि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी उनके निर्धारित कोटे से अधिक है चाहे वे मेरीट के आधार पर आये हो या पिछड़ा वर्ग का आरक्षण लागू होने से पहले आये हो उन्हें भी उनके आरक्षित वर्ग में गिना जाकर आरक्षित वर्ग के निर्धारित कोटे से अधिक यदि उस वर्ग के कर्मचारी है तो उस विभाग की नई भर्ती में उस वर्ग की रिक्तयो को उतना कम कर दिया जाता है जितने अभ्यर्थी उस वर्ग के उनके निर्धारित कोटे अधिक है। ये व्यवस्था राज्य सरकार की आरक्षण नीति के विरूद्ध है। हालांकि अनु0जाति, जनजाति के अभ्यर्थी सामान्यतया किसी संवर्ग में उनके निर्धारित कोटे से अधिक नही होते लेकिन अन्य पिछडा वर्ग के अभ्यर्थी अनारक्षित पदों पर भी मेरीट के आधार पर आते है ऐसी - स्तिथि में इस प्रकिया में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण विपरीत रूप  से प्रभावित हो रहा है।

5. अनारक्षित वर्ग में महिलाओं के आरक्षण में केवल मात्र अनारक्षित वर्ग की महिलाओं को ही आरक्षण दिया जा रहा है जबकि अनारक्षित वर्गों पर सभी वर्गों का समान अधिकार है। अत: अनारक्षित वर्ग में महिलाओं का आरक्षण भी मेरीट के आधार पर सभी वर्ग की महिलाओं को होना चाहिये।

6. अनारक्षित वर्ग पर नियुक्ति दिये गये जो अभ्यर्थी सेवा ज्याईन नही करते है उनके स्थान पर मेरीट के आधार पर ही नये अभ्यर्थियों को मौका देना चाहिये और ऐसी मेरीट में यदि आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी हो जिन्हें उनके वर्ग में आरक्षण के आधार पर नियुक्ति दे दी गई है उन्हें अनारक्षित वर्ग की नियुक्ति  सूची में रखा जाना चाहिये तथा इस प्रकार आरक्षित वर्ग में रिक्त हुये स्थानों को भी आरक्षित अभ्यर्थियों से भरना चाहिये लेकिन इस नियम की पालना नही की जा रही यहां तक कि लोक सेवा आयोग भी इस नियम की पालना नही कर रहा है।

7. नियुक्तियो एवं प्रवेश  के मामलें में मेरीट क्रमांक, मेरीट नम्बरों का प्रतिशत , आरक्षण की – स्तिथि इत्यादि विभाग/शिक्षण संस्थान की वेबसाईट पर प्रदर्शित  करनी चाहिये जिससे कि पारदर्शित दिखे। लेकिन अधिकांश  विभाग अपनी गलतियों को छुपाने के लिये नियुक्तियों में पारदर्शित नही बताते तथा उपरोक्त उल्लेखित -स्तिथि को वेबसाईट पर प्रदर्शित  नही करते।

8. राज्य सरकार का आदेश है कि एकल पद पर आरक्षण नही होगा। इन आदेशो  की ओट में कुछ विभाग  विशेषत  विश्वविघयालयों में प्रत्येक विभाग के प्रत्येक विषय के सहायक प्राेफेसर, एसोसियट प्राेफेसर एवं प्राेफेसर के पदों को एकल पद मानकर इन पदों को आरक्षण से बाहर कर दिया है। उदाहरणार्थ राजस्थान संस्कृत विश्वविघयाल।

9. नेनाल विश्वविघयाल जोधपुर राज्य सरकार द्वारा स्थापित विश्वविघयालय  है लेकिन यह विश्वविघयालय राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू नही कर रहा है।

10. राज्य सरकार की आरक्षण नीति को लागू नही करने तथा आरक्षण को विकृत करने, अनारक्षित वर्ग को 50 प्रतिशत  आरक्षण देने तथा उपरोक्त प्रकार की त्रुटियों के मामलें में राज्य सरकार ने आजतक न तो किसी नियुक्ति अधिकारी से प्रश्न किया है और न ही किसीनियुक्ति  अधिकारी को  द-ण्डत किया है। ऐसी -स्तिथि में नियुक्ति  अधिकारी राज्य सरकार की आरक्षण नीति को मनमाने तरीके से लागू कर रहे है।

राजस्थान जाट महासभा ने आरक्षण की व्यवस्था को उपरोक्तानुसार सही ठंग से लागू किये जाने तथा अनियमतताओं पर रोक के लिये मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार को निवेदन किया है। इस सम्बन्ध में पूर्व में राजस्थान लोकसेवा आयोग राजस्थान विश्वविघयालय, राजस्थान के मुख्य सचिव, राजस्थान के राज्यपाल, कार्मिक विभाग राजस्थान सरकार तथा अन्य सम्बधित विभागों को समय-समय पर पत्र लिखकर लगातार निवेदन किया जा रहा है।


भारत सरकार के विभिन्न विभागों, उपक्रमो, बैंको एवं अन्य संस्थानों में राजस्थान के जाटों को आरक्षण सम्बधित भ्रांति के सम्बन्ध में लिखे गये पत्र की प्रति।

डॉ0 जितेन्द्र सिंह,
मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायात एवं पेन्ना  (कार्मिक एवं प्रशिक्षण) विभाग,
नई दिल्ली।

विषय:- राजस्थान के जाट जाति को आरक्षण के सम्बन्ध में।

महोदय,
निवेदन है कि भारत सरकार की अधिसूचना सं. 12011/68/98-बी.सी.सी. दिनांक 27.10.99 द्वारा राजस्थान की जाट जाति को (भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर) भारत सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित किया था जिसकी प्रति संलग्न है। भारत सरकार की उक्त अधिसूचना आज भी प्रभाव में है अर्थात राजस्थान की जाट जाति (भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर) भारत सरकार, भारत सरकार के उपक्रमो एवं भारत सरकार की राष्ट्रीयकृत बैंको में आरक्षण की सूची में है।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने राम सिंह बनाम यूनियन आँफ इणि्डया निर्णय दिनांक 17.3.2015 में बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली राजधानी क्षेत्र, राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर जिले, उत्तर प्रदेश और उतराखण्ड की जाट जाति को भारत सरकार की आरक्षण सूची में सम्मिलित किये जाने की अधिसूचना क्रमांक 63 दिनांक 4.3.2014 को निरस्त किया है। उक्त निर्णय द्वारा राजस्थान के जाट जाति (भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर) की आरक्षण की अधिसूचना दिनांक 27.10.99 अप्रभावित है। यह भी उल्लेखनीय है कि उपर उल्लेखित राज्यों की राज्य सरकारों द्वारा जाट जाति को उनके राज्य की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित किये जाने की अधिसूचनाऐं भी उच्चतम न्यायालय के निर्णय दिनांक 17.3.2015 से अप्रभावित है।
अभी कर्मचारी चयन आयोग द्वारा सीपीओ एस आई परीक्षा 2014 का परिणाम दिनांक 31.3.2015 को जारी किया गया है जिसमें यद्पि राजस्थान राज्य सहित सभी नो राज्यों के अभ्यार्थियों को अन्य पिछड़ा वर्ग मे मानकर परीक्षा परिणाम जारी किया गया था लेकिन आयोग ने सुपिम कोर्ट के निर्णय दिनांक 17.3.2015 के परिपेक्ष्य में अन्य राज्यों के साथ-साथ राजस्थान के जाट जाति के चयनित अभ्यार्थियों की नियुक्ति  भी रोक दी है जबकि सुपिम कोर्ट के निर्णय में राजस्थान की जाट जाति को भारत सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में सम्मिलित किये जाने की अधिसूचना दिनांक 27.10.99 न तो चुनोती में थी और न ही प्रभावित है अर्थात राजस्थान की जाट जाति को (भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर) भारत सरकार की सेवाओं में आरक्षण यथावत प्राप्त है।
अत: कृपया राजस्थान के जाट जाति के (भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को छोड़कर) चयनित अभ्यार्थियों की नियुक्ति  के प्रस्ताव शीघ्र सम्बधित विभागों को प्रेषित किये जाये।
सादर।
भवदीय
(राजाराम मील)
अध्यक्ष
राजस्थान जाट महासभा


नेनाल विधि   विश्वविद्यालय में आरक्षण के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री जी, राजस्थान सरकार को लिखे पत्र की प्रति  11.6.2015

 

मुख्यमंत्री जी,

राजस्थान सरकार,

जयपुर।

विषय:- नेनाल  विधि  विश्वविद्यालय जोधपुर में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के सम्बन्ध में।

महोदया,
नेनाल विधि विश्वविद्यालय जोधपुर राजस्थान विधानसभा के अधिनियम द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय है अत: ये विश्वविद्यालय पूर्णत्या राज्य सरकार का उपक्रम है। राज्य सरकार ने एक एक्जिटिव आदेश द्वारा राज्य के सभी विश्वविद्यालय , कॉलेजों एवं उच्च -शिक्षण संस्थाओं की सेवाओं एवं प्रवेश में एस सी, एस टी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण किया हुआ है लेकिन नेनाल विधि  विश्वविद्यालय जोधपुर राज्य सरकार के आरक्षण से सम्बधित  उपरोक्त आदेश की पालना नही कर रहा है तथा इस विश्वविद्यालय में अन्य पिछड़े वर्ग का कोई आरक्षण नही है। यहां तक कि एस सी व एसटी का आरक्षण भी वैकल्पिक है। प्रारम्भ में जब इस विश्वविद्यालय को स्थापित करने का अधिनियम बनाया गया था उस अधिनियम में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का प्रावधान था लेकिन तत्प’चात तत्कालीन विधि  मंत्री ने पिछडे वर्ग के विरूद्ध एक षडयंत्र के तहत अधिनियम में एक संशोधन करवाकर पिछड़े वर्ग के आरक्षण को समाप्त करवा दिया।
इस विधि   विश्वविद्यालय की स्थापना इस उदेश्य से की गई थी कि विधि  विज्ञान से सम्बधित   उत्कृष्ट श्रेणी के विद्यार्थी तैयार किये जाये जो आगे चलकर राज्य की विधि सेवाओं तथा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हो तथा उत्कृष्ट श्रेणी के अधिवक्ता बने। उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना से अब तक इस उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता कोटे से अनु0जाति, जनजाति तथा पिछड़ी जाति का केवल मात्र एक अधिवक्ता नियुक्त हुआ है। अनु0जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के विरूद्ध षड़यंत्र के तहत ही नेनाल विधि विश्वविद्यालय जोधपुर पिछड़ा वर्ग के छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश में आरक्षण नही दे रहा है।

उल्ल्खनीय है कि इस विश्वविद्यालय की शासकीय परिषद के अध्यक्ष मुख्य न्यायाधीश है। अत: निवेदन है कि नेनाल विधि विश्वविद्यालय जोधपुर में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण विश्वविद्यालय  के अधिनियम में संशेाधन कर प्रावधान किया जाये जिससे कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार की नीति एंव आदेशेा की अवहेलना नही कर सके।

सादर।
भवदीय
(राजाराम मील)
अध्यक्ष
राजस्थान जाट महासभा